हिमालयी सुरक्षा और विकास नीतियाँ: एक बहुआयामी सामाजिक-राजनीतिक विमर्श

हिमालयी सुरक्षा और विकास नीतियाँ: एक बहुआयामी सामाजिक–राजनीतिक विमर्श

डा. दलीप सिंह बिष्ट

असिस्टेंट प्रोफेसर एवं विभाग प्रभारी

राजनीति विज्ञान विभाग

धर्मानंद उनियाल राजकीय महाविद्यालय नरेन्द्रनगर, टिहरी गढवाल

drdalipbisht@gmail.com

शोध सार :

हिमालय विश्व की सबसे युवा पर्वत शृंखलाओं में से एक होने के साथ-साथ दक्षिण एशिया की पारिस्थितिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा सामरिक संरचना का आधार है। भारत के लिए हिमालय केवल प्राकृतिक संसाधनों का स्रोत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, जल सुरक्षा, जैव विविधता तथा आजीविका का भी आधार है। जलवायु परिवर्तन, अनियोजित विकास, तीव्र नगरीकरण, जलविद्युत परियोजनाएँ, पर्यटन, सीमा विवाद तथा प्राकृतिक आपदाएँ हिमालय के समक्ष गंभीर चुनौतियाँ प्रस्तुत कर रही हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र हिमालयी सुरक्षा और विकास नीतियों का सामाजिक-राजनीतिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करता है। अध्ययन में यह प्रतिपादित किया गया है कि हिमालय का संरक्षण केवल पर्यावरणीय विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, लोकतांत्रिक शासन, स्थानीय समुदायों की भागीदारी तथा सतत विकास से जुड़ा हुआ प्रश्न है। शोध का निष्कर्ष है कि हिमालय के लिए ऐसी नीतियाँ आवश्यक हैं जिनमें पर्यावरणीय संरक्षण, सामाजिक न्याय, स्थानीय सहभागिता और राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।

मुख्य शब्द: हिमालय, सुरक्षा, सतत विकास, पर्यावरणीय शासन, सामाजिक-राजनीतिक विमर्श, जलवायु परिवर्तन, राष्ट्रीय सुरक्षा।

DOI link – https://doi.org/10.69758/GIMRJ/2607I01VXIVP0001

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