विकसित भारत 2047 के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा

विकसित भारत 2047 के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा

डॉ. अंकुश तुलसीराम औंधकर

एसोसिएट प्रोफेसर, केंद्रीय हिंदी संस्थान

Email: drankushkhs@gmail.com

परिचय

“विकसित भारत” की अवधारणा एक ऐसे राष्ट्र की परिकल्पना करती है जो आर्थिक सशक्तिकरण, वैज्ञानिक उन्नति, तकनीकी नवाचार और सामाजिक समावेशन के माध्यम से सतत एवं समावेशी विकास के पथ पर अग्रसर हो। यह दृष्टिकोण केवल सकल घरेलू उत्पाद या भौतिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव विकास, जीवन की गुणवत्ता, नैतिक मूल्यों और पर्यावरणीय संतुलन को भी समान रूप से महत्व देता है। इस व्यापक लक्ष्य की प्राप्ति में भारत की अपनी भारतीय ज्ञान परंपराएँ (Indian Knowledge Systems – IKS) एक सुदृढ़ वैचारिक एवं व्यवहारिक आधार प्रदान कर सकती हैं (Sen, 2005; Ministry of Education, 2020)।

भारतीय ज्ञान परंपरा उस व्यापक, गहन और बहुआयामी बौद्धिक विरासत का प्रतिनिधित्व करती है, जो भारतीय उपमहाद्वीप में हजारों वर्षों के चिंतन, अनुभव, अवलोकन और प्रयोग की निरंतर प्रक्रिया से विकसित हुई है। यह परंपरा केवल दार्शनिक विमर्श तक सीमित नहीं रही, बल्कि जीवन के प्रत्येक पक्ष—दर्शन, विज्ञान, गणित, चिकित्सा, खगोल विज्ञान, साहित्य, कला, नैतिकता, समाज और शासन—को समग्र रूप में समझने का प्रयास करती रही है (Radhakrishnan, 1951)।

DOI link – https://doi.org/10.69758/GIMRJ/2512I10VXIIIP0005

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