सतत विकास के लक्ष्य प्राप्ती मे ग्रामीण क्षेत्र की भुमिका
प्रा.चंद्रशेखर नामदेव गौरकार
अर्थशात्र विभागप्रमुख,एस.बी. महाविद्यालय,अहेरी
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सारांश : –
इस इक्कीसवी सदी मे सारी दुनिया एक बहोत बुरी दौर से गुजर रही है, क्योंकी हमारे पृथ्वी पर अनगिनत समस्या निर्माण हो रही है I इस परिणाम स्वरूप संपूर्ण सृष्टि मे परिवर्तन नजर आ रहा है I यह परिवर्तन संपूर्ण जीव सुष्टी के लिये हानिकारक है I इस समस्या से छुटकारा पाने के लिये विविध स्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं I इसी पहल मे संयुक्त राष्ट्रसंघ व्दारा २००० से २०१५तक के लिये Millennium Development Goals(MDGs) तयार किये गये इसी कडी मे आगे सुधार करते हुये २०१५ से २०३० तक के नये ‘१७’ Sustainable Development Goals (SDGs) निश्चित किये गये I भारत इस संघ का सदस्य होने कारण इस SDGs धोरण का स्वीकार किया गया I विविध कार्यक्रम के मध्यम से SDGs प्राप्त करणे प्रयास किया जा रहा हैं I भारत मे वास्तविक रूप देखा गया तो ग्रामीण क्षेत्र के विभिन्न अंगो जैसे परंपरागत व्यवसाय,आध्यामिक परंपराए,साधा रहन सहन इत्यादी व्दारा सदियोंसे अपने आपही SDGs को पुरा करने का प्रयास किया गया I
बिज शब्द :- ग्रामीण, सतत,विकास,उदिष्टे,आध्यात्मिक,परंपरागत.
DOI link – https://doi.org/10.69758/GIMRJ/2511S01V13P013
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