पागलखाना उपन्‍यास में अभिव्‍यक्‍त बाजारवाद का स्‍वरूप

पागलखाना उपन्‍यास में अभिव्‍यक्‍त बाजारवाद का स्‍वरूप

डॉ.गरिमा सिंह

522 A/ 21A/5A UNCHWA GARI,

RAJAPUR, PRAYAGRAJ, U.P. PIN- 211002

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ज्ञान चतुर्वेदी हिंदी साहित्य जगत में सातवें दशक से ही सक्रिय रहे हैं। ये व्यंग्यकार के रूप में जीतने प्रसिद्ध हुए उतने ही उपन्यासकार के रूप में भी। उनके नाना ओरछा के राजकवि थे और मामा भी प्रसिद्ध कवि रहे अतः इन्हें साहित्यिक परिवेश इनके घर से ही प्राप्त हुआ।  मैथिलीशरण गुप्त जैसे प्रसिद्ध कवियों का इनके घर आना-जाना लगा रहता था। यह एक महज संयोग है कि ये पेशे से हृदयरोग विशेषज्ञ थे लेकिन हिन्दी प्रेम ने इन्हें ज्यादा प्रसिद्धि दिलायी और अंततः ये हिन्दी के ही हुए।

DOI link – https://doi.org/10.69758/GIMRJ/2501I1VXIIIP0002

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