प्रवासी श्रमिकों के किशोर बच्चों के बीच तनावः कारण, प्रभाव और समाधान एक समाजशास्त्रीय अध्ययन, बलौदा बाजार कसडोल विकास खंड के विशेष संदर्भ में

प्रवासी श्रमिकों के किशोर बच्चों के बीच तनावः कारण, प्रभाव और समाधान एक समाजशास्त्रीय अध्ययन, बलौदा बाजार कसडोल विकास खंड के विशेष संदर्भ में

डॉ. अशोक कुमार देवांगन,

यूडीसी-2

पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर, छ.ग.

सारांश

प्रवासी श्रमिकों के किशोर बच्चों को अनेक सामाजिक, आर्थिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जो उनके संपूर्ण विकास को प्रभावित करती हैं। बलौदा बाजार कसडोल विकासखंड के विशेष संदर्भ में किए गए इस समाजशास्त्रीय अध्ययन में प्रवासी परिवारों के किशोर बच्चों के तनाव के प्रमुख कारणों, उनके प्रभावों और संभावित समाधानों का विश्लेषण किया गया है।

अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि पारिवारिक विछोह, आर्थिक अस्थिरता, सामाजिक अस्वीकार्यता, शिक्षा में बाधा, और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ प्रमुख तनाव कारक हैं। इन चुनौतियों का प्रभाव किशोरों के आत्मविश्वास, शिक्षा, सामाजिक संबंधों और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है, जिससे वे अवसाद, गुस्सा, नशे की लत या अपराध प्रवृत्ति की ओर आकर्षित हो सकते हैं।

समाधान के रूप में, प्रवासी बच्चों के लिए शैक्षिक सहायता, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, सामुदायिक सहयोग और आर्थिक स्थिरता प्रदान करने की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त, श्रमिकों को अपने परिवार के साथ समय बिताने के अवसर देने और समाज को प्रवासी बच्चों को अपनाने के लिए प्रेरित करने से उनकी कठिनाइयों को कम किया जा सकता है।

इस अध्ययन का निष्कर्ष यह है कि प्रवासी श्रमिकों के किशोर बच्चों के तनाव को कम करने के लिए समग्र प्रयासों की आवश्यकता है, जिसमें सरकार, समाज, शैक्षिक संस्थान और परिवारों की महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए। उचित नीतियों और योजनाओं के माध्यम से इन बच्चों के भविष्य को सुरक्षित और उज्जवल बनाया जा सकता है।

DOI link – https://doi.org/10.69758/GIMRJ/2501I02S01V13P0009

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