दूरदर्शन और भारतीय ज्ञान परंपरा का सामान्य लोगो पर प्रभाव का अध्ययन
Dr. Krishna P. Meshram,
Associate Professor & Head Sociology,
Pragati Mahila Kala Mahavidyalaya, Bhandara
Mo. 9422134001
E Mail: kp_pmm@rediffmail.com
सारांश: दूरदर्शनज्ञान और मनोरंजन का एक सशक्त माध्यम है, जिसने विश्व भर में ना केवल सूचना प्रसारण का कार्य किया है, बल्कि सामाजिक जनजागृति का भी कार्य किया है| वर्त्तमान में दूरदर्शन के असंख्य चैनलों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा के विशिष्ट परंपरा को ही प्रसारण के द्वारा सामान्य लोगो की सोच, मानसिकता या दृष्टिकोण बनाने का कार्य किया जा रहा है| जिसे सामान्य लोग भी विशिष्ट परंपरा को ही भारतीय ज्ञान परंपरा मानने लगे है| जिस भारतीय ज्ञान परंपरा में वैदिक, चार्वाक, जैन, बुद्ध, मध्ययुगीन संतों के कार्य, आधुनिक समाजसुधारकों के कार्यो इत्यादि मिश्रित कार्यो, आचरणों के नियमों को दर्शाने की परंपरा का उल्लेख है, वहां किसी एक परंपरा को ही श्रेष्ठ मानना और उसे मानने वाले को ही राष्ट्रभक्त घोषित करना और राष्ट्रवाद की नयी परिभाषा करना, पक्षपात के नरेटीव्ह को जन्म देती है| अध्ययनकर्ती ने दूरदर्शन और भारतीय ज्ञान परंपरा का सामान्य लोगो पर होनेवाले प्रभाव को अपने शोध निबंध का विषय बनाकर द्वितिय तथ्यों के आधार पर इस शोध निबंध का विश्लेषण किया है|
बिज शब्द: दूरदर्शन, भारतीय ज्ञान परंपरा, राष्ट्रवाद
DOI link – https://doi.org/10.69758/GIMRJ/2601S01V14P033
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