डॉ.राम बोध पाण्डेय लिखित महाकाव्य युगप्रवर्तक छत्रपति शिवाजी महाराज: एक अध्ययन
डॉ. अमलपुरे सूर्यकांत विश्वनाथ
अध्यक्ष हिंदी विभाग, डॉ . श्री .नानासाहेब धर्माधिकारी कॉलेज कोलाड, तहसील – रोहा, जिला – रायगड, महाराष्ट्र पिन – ४०२३०४
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सारांश :-
भारतवर्ष में अनेक शूरों का पराक्रम हमने देखा है । पूरब से पश्चिम और दक्षिण से उत्तर तक अनेक शूरवीरों ने अपना शौर्य पराक्रम दिखाकर अखंड भारत का निर्माण किया है । महाराष्ट्र के शूरवीर योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम पूरे विश्व में फैल चुका है । युगप्रवर्तक और जानता राजा के रूप में उनको हम सब लोग पूजते हैं । छत्रपति शिवाजी महाराज ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी थे जिनका भारतीय इतिहास में आगमन एक युगांतरकारी घटना है उनका साहस शौर्य पराक्रम संगठन शक्ति और राजनीतिक चातुर्य दूर दृष्टि विचार आदि उच्च कोटि के गुण उनके व्यक्तित्व में दिखाई देते हैं । ऐसे महान युग प्रवर्तक छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर हिंदी के प्रसिद्ध कवि थे रामबोद पांडे ने महाकाव्य लिखा है । यह उनका चौथा ऐतिहासिक महाकाव्य है । जिसमें छत्रपति शिवाजी महाराज के जन्म से लेकर राज्याभिषेक तक का यथार्थ चित्र काव्यात्मक दृष्टि से किया है । यह बहुत बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जाती है । प्रस्तुत महाकाव्य में कल २० सर्ग है, प्रारंभ से लेकर अंत तक विभिन्न छंदों का चित्रण भी किया है । अलंकार एवं रस युक्त भाषा प्रभाव भी इसमें दिखाई देता है ।
कुंजी शब्द :- युग प्रवर्तक, युग पुरुष, छत्रपति, पराक्रम, राजनीतिक चातुर्य, दूरदृष्टि, राज्याभिषेक, महाकाव्य आदि ।
DOI link – https://doi.org/10.69758/GIMRJ/2505S01V13P013
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