झारखंड में जनजातीय बच्चों की प्राथमिक शिक्षा की स्थिति और विकास की दिशा
Dr. Satish Chandra Yadav
Designation-Assistant Professor,
Jasidih B.Ed College, Deoghar, Jharkhand, 814142
Mobile-9851110225
सारांश: शोध लेखों और परिस्थितिजन्य अध्ययनों के अनुसार, झारखंड में आदिवासी बच्चों की प्राथमिक शिक्षा की स्थिति गंभीर बाधाओं से घिरी हुई है; फिर भी, वर्तमान सरकारी पहल कुछ उत्साहजनक रुझान और सुधार की स्पष्ट दिशा दर्शाती हैं। हालाँकि नामांकन दर में वृद्धि हुई है, फिर भी सामाजिक-आर्थिक, भाषाई और बुनियादी ढाँचे की समस्याएँ अभी भी मौजूद हैं, जिसके लिए एक बहुआयामी रणनीति की आवश्यकता है। झारखंड के आदिवासी बच्चों की बुनियादी शिक्षा की स्थिति सरकारी प्रयासों और बाधाओं, दोनों का परिणाम है। हालाँकि शिक्षा का स्तर लगातार बढ़ रहा है, फिर भी कई चुनौतियाँ हैं जिनका समाधान सरकार और गैर-सरकारी संगठन करने की कोशिश कर रहे हैं। झारखंड की कुल आबादी में आदिवासी लोगों की संख्या काफ़ी ज़्यादा है। झारखंड में, आदिवासी लोगों की साक्षरता दर अन्य सामाजिक समूहों की तुलना में काफ़ी कम है। उन्हें सहानुभूति सिखाई जानी चाहिए। उनके समावेशी विकास के लिए, सरकार को एक विशिष्ट पैकेज और विशेष ध्यान देना होगा। सतत समावेशी विकास का एकमात्र तरीका शिक्षा है, खासकर आदिवासी विद्यार्थियों के लिए प्रारंभिक शिक्षा। सदियों से वंचित आदिवासी लोगों के उत्थान के लिए यह बेहद ज़रूरी है।
कीवर्ड: प्राथमिक शिक्षा, साक्षरता दर, समावेशी विकास, बुनियादी शिक्षा
DOI link – https://doi.org/10.69758/GIMRJ/2511I10VXIIIP0001
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