भारतीय ज्ञान प्रणाली में आर्थिक न्याय की अवधारणा— डॉ. भीमराव अम्बेडकर एवं चाणक्य नीति के विशेष सन्दर्भ में
*सीमा आर्य
एच. एन. बी. गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर
**प्रो. सीमा धवन
एच. एन. बी. गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर
सारांश
भारतीय इतिहास में चाणक्य एक महान अर्थशास्त्री थे जिन्होंने भारत में मौर्य साम्राज्य की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चाणक्य द्वारा रचित चाणक्य नीति एक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ हैं, जिसमें मानवीय जीवन जीने के राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक, एवं व्यक्तिगत जीवन से सम्बंधित विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया हैं। चाणक्य के अनुसार राजा को जनता से उसी प्रकार कर लेना चाहिए जिस प्रकार सूरज पृथ्वी से जलवाष्प लेकर वर्षा करता हैं। चाणक्य की नीतियों को अपनाने से जीवन में वित्तीय सफलता हासिल हो सकती हैं। ज्ञान के प्रतीक डॉ. भीमराव अम्बेडकर का भी दृष्टिकोण बहुआयामी था। उन्होंने भी मानवीय विकास एवं समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लाने के लिए राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक, क्षेत्रों में विभिन्न कार्य किए। वह एक उच्च कोटि के अर्थशास्त्री थे। वह समाज में व्याप्त सामाजिक-आर्थिक असमानता को समाप्त करके समाज के प्रत्येक वर्ग को सामाजिक और आर्थिक न्याय दिलाना चाहते थे। डॉ. भीमराव अम्बेडकर का दृष्टिकोण सभी पहलुओं पर समावेशी एवं न्यायसंगत था। डॉ. भीमराव अम्बेडकर और चाणक्य ने अपने समय में आर्थिकी से सम्बंधित कई समस्याओं और उनके निवारण के लिए महत्वपूर्ण नीतियों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। जिनकी प्रासंगिकता वर्तमान समय में भी हैं। प्रस्तुत शोध कार्य गुणात्मक विधि पर आधारित हैं, जिसमें डॉ. भीम राव अम्बेडकर के आर्थिक विचारों के प्रति शिक्षक प्रशिक्षुओं के दृष्टिकोण का अध्ययन किया गया हैं। शिक्षक प्रशिक्षुओं के दृष्टिकोण के आकलन हेतु स्व-निर्मित उपकरण का निर्माण किया गया हैं, जिसमें डॉ. भीम राव अम्बेडकर के आर्थिक विचारों से सम्बंधित प्रश्नावली का प्रयोग करके शिक्षक प्रशिक्षुओं के स्वं आकलन को प्रस्तुत किया गया हैं तथा परिणाम का चाणक्य नीतियों के अनुसार समीक्षा की गई हैं।
मुख्य शब्द— डॉ. भीमराव अम्बेडकर, चाणक्य नीति, आर्थिक विचार, मानवीय विकास, सकारात्मक परिवर्तन, भारतीय ज्ञान प्रणाली, अर्थशास्त्री।
DOI link – https://doi.org/10.69758/GIMRJ/2508S01V13P009
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