डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस.) पर विस्तृत विचार: एक आलोचनात्मक विश्लेषण
प्रा. डॉ. धिरजकुमार नजान,
सहयोगी प्राध्यापक,
मो. 7875635888
ईमेल: profdlnajan994@gmail.com
डॉ. गोपाळराव खेडकर महाविद्यालय,
गाडेगाव (तेल्हारा) जि. अकोला
* परिचय:
यह संशोधित लेख डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर दृष्टिकोण का आलोचनात्मक परीक्षण करती है, जो सत्यापित ऐतिहासिक विश्लेषण और समकालीन शोध पर आधारित है। इसका मुख्य फोकस अम्बेडकर की हिंदू राष्ट्रवाद की आलोचना, जाति व्यवस्था के विरोध, और अम्बेडकर के सामाजिक सुधार एजेंडे और आरएसएस के सांस्कृतिक एकता के दृष्टिकोण के बीच वैचारिक तनाव और बातचीत पर है। सभी अंतर्दृष्टि सख्ती से प्रदान किए गए सारांशों और स्रोत सामग्रियों पर आधारित हैं।
भारतीय सामाजिक और राजनीतिक इतिहास में डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण और अद्वितीय है। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन शोषित, वंचित, दलित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की रक्षा और उनके सामाजिक उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार के रूप में, उन्होंने भारत को एक आधुनिक, लोकतांत्रिक, और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
DOI link – https://doi.org/10.69758/GIMRJ/2507S01V13P007
Download