हिंदी साहित्य में दिव्यांग-विमर्श

हिंदी साहित्य में दिव्यांग-विमर्श

मनोज शर्मा

शोधार्थी  पी एच डी हिंदी

दिल्ली विश्वविद्यालय

9868310402

mannufeb22@gmail.com

सारांश

सामान्य अर्थों में विकलांगता ऐसी शारीरिक एवं मानसिक अक्षमता है जिसके चलते कोई व्यक्ति सामान्य व्यक्तियों की तरह किसी कार्य को करने में अक्षम होता है. तकनीकी दृष्टि से विकलांग एवं विकलांगता व्यापक संदर्भ वाले शब्द हैं जिनकी एक से अधिक परिवर्तनशील परिभाषाएँ हैं. भारत में ऐसे व्यक्ति को विकलांग माना गया है जो चिकित्सा अधिकारी द्वारा प्रमाणित 40 प्रतिशत से कम विकलांगता का शिकार न हो.विकलांग मानव समाज के समक्ष कोई नई समस्या नहीं है. विकलांगता की मुख्यत:चार श्रेणियां हैं- दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित,वाकबाधित और मानसिक या अस्थि विकलांग. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2015 के मन की बात कार्यक्रम में विकलांग को दिव्यांग नाम दिया. उनके सुझाव के पश्चात से यह शब्द चलन में है. 3 दिसंबर को विश्वस्तर पर विकलांग दिवस के रूप में स्मरण किया जाता है.

बीज शब्द :- विकलांग, दिव्यांग, साहित्य,संस्था,संवेदना,अधिकार,विमर्श, उपलब्धि

DOI link – https://doi.org/10.69758/GIMRJ/2505I6VXIIIP0003

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